दोष निवारण से लेकर ग्रह शांति और विशेष अनुष्ठान तक — हर पूजा कुंडली विश्लेषण के बाद, शुभ मुहूर्त में, पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से संपन्न होती है।
कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तो बनता है कालसर्प दोष। सुनने में डरावना लगता है? असल म…
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मांगलिक होना कोई अभिशाप नहीं — पर विवाह में देरी, वैवाहिक कलह या रिश्तों में तनाव इसके सामान्य लक्षण हैं। और स…
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घर में सब कुछ होते हुए भी सुख नहीं? पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक जैसी समस्याएं — संतान बाधा, आर्थिक अस्थिरता, पारिवारिक क…
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बच्चे का जन्म अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती नक्षत्र में हुआ है? तो ज्योतिष शास्त्र इसे गंडमूल …
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चंद्रमा अकेला पड़ जाए — आगे-पीछे कोई ग्रह न हो — तो बनता है केमद्रुम योग। परिणाम? मन की अशांति, निर्णय लेने मे…
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गुरु के साथ राहु या केतु बैठ जाएं, तो बनता है गुरु चांडाल दोष। गुरु यानी ज्ञान, धर्म और भाग्य — और राहु उसे भ्…
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मंगल और राहु की युति — ज्योतिष में इसे अंगारक योग कहते हैं। आग और धुएं का मेल। क्रोध बढ़ता है, दुर्घटनाओं का भ…
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जन्म कुंडली में सूर्य के साथ राहु या केतु की युति हो, तो सूर्य ग्रहण दोष बनता है। पिता से संबंध, सरकारी कार्य,…
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चंद्रमा मन का कारक है। जब कुंडली में चंद्र के साथ राहु-केतु आ जाएं, तो बनता है चंद्र ग्रहण दोष — और मन पर ग्रह…
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पूर्वजों द्वारा या अनजाने में हुई सर्प हत्या का प्रभाव पीढ़ियों तक चलता है — इसे ही नाग दोष या सर्प दोष कहा जा…
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शनि और चंद्रमा की युति से बनता है विष योग। नाम जितना कठोर, प्रभाव भी वैसा — मन पर उदासी की परत, स्वास्थ्य में …
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काम बनते-बनते रुक जाना। पैसा आते-आते अटक जाना। रिश्ते जुड़ते-जुड़ते टूट जाना। ज्योतिष में इसे बंधन योग कहते है…
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कई बार समस्या किसी एक ग्रह की नहीं होती — दो या अधिक ग्रहों की विशेष युति मिलकर अशुभ प्रभाव बनाती है। इसे युक्…
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शनि और राहु की युति — ज्योतिष इसे श्रापित योग कहता है। मान्यता है कि यह पूर्व जन्म के किसी श्राप का संकेत है, …
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नौ ग्रह — और हर ग्रह जीवन के किसी न किसी पहलू का स्वामी। जब कई ग्रह एक साथ प्रतिकूल हों, तो अलग-अलग उपाय करने …
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साढ़ेसाती। ढैय्या। शनि की महादशा। ये शब्द सुनते ही चिंता होना स्वाभाविक है। पर शनि दंड नहीं, न्याय के देवता है…
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राहु — छाया ग्रह, पर प्रभाव किसी से कम नहीं। भ्रम, व्यसन, अचानक हानि, बदनामी — ये राहु की देन हैं। और अचानक चम…
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केतु मोक्ष का कारक है — पर पीड़ित हो तो अकारण भय, त्वचा रोग, और जीवन में दिशाहीनता देता है। ध्वज के समान यह ग्…
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बृहस्पति — देवताओं के गुरु, भाग्य और विस्तार के कारक। कमजोर गुरु यानी रुका भाग्योदय, विवाह में विलंब, संतान बा…
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शुक्र — भोग, ऐश्वर्य, प्रेम और कला के दाता। कुंडली में शुक्र कमजोर हो तो वैवाहिक सुख अधूरा, आर्थिक तंगी, और जी…
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सूर्य आत्मा का कारक है — तेज, नेतृत्व, पद-प्रतिष्ठा सब सूर्य से। कुंडली में पीड़ित सूर्य आत्मविश्वास छीन लेता …
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चंद्रमा मन है। और मन अशांत, तो सब अशांत। पीड़ित चंद्र अनिद्रा, चिंता, भावनात्मक अस्थिरता और माता के कष्ट के रू…
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बुध — बुद्धि, वाणी और व्यापार के स्वामी। कमजोर बुध यानी निर्णयों में चूक, वाणी दोष, गणित-लेखन में कमजोरी और व्…
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घर में रोज़ की कहासुनी। छोटी बात पर बड़े झगड़े। सदस्य एक छत के नीचे, पर मन कोसों दूर। गृह-कलेश सिर्फ स्वभाव का…
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"त्र्यम्बकं यजामहे..." — महामृत्युंजय मंत्र को मृत्युंजय कहा गया है, यानी मृत्यु को भी जीतने वाला। गंभीर बीमार…
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रामचरितमानस का सबसे सुंदर अध्याय — जहां हनुमान जी असंभव को संभव करते हैं। यही कारण है कि जब हिम्मत टूटने लगे, …
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रुद्रयामल तंत्र का वह गुप्त स्तोत्र, जिसके बारे में स्वयं शिवजी कहते हैं — बिना कुंजिका के दुर्गा सप्तशती का प…
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700 श्लोक। 13 अध्याय। और मां दुर्गा की संपूर्ण शक्ति का आवाहन। दुर्गा सप्तशती चंडी पाठ हिंदू धर्म के सबसे शक्त…
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हर शुभ अवसर की सबसे प्रिय पूजा। गृह प्रवेश हो, विवाह की वर्षगांठ, नया व्यापार या मनोकामना पूर्ति का धन्यवाद — …
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द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी — बाबा महाकाल। और उनका रुद्राभिषेक, यानी साक्षात काल के स्वामी का…
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मेहनत पूरी, पर बरकत नहीं? धन आता है, पर टिकता नहीं? यही वह स्थिति है जहां महालक्ष्मी पूजा का विधान है। श्री सू…
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लक्ष्मी केवल धन नहीं — आठ रूप हैं उनके। धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विज…
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दस महाविद्याओं में आठवीं — मां बगलामुखी, शत्रुओं की वाणी और बुद्धि को स्तंभित करने वाली। कोर्ट केस, राजनीतिक प…
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जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु — स्थिरता, समृद्धि और शांति के दाता। पुरुष सूक्त और विष्णु सहस्रनाम के साथ महा …
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परिवार में किसी की अकाल मृत्यु हुई हो — दुर्घटना, आत्महत्या या अपूर्ण इच्छाओं के साथ — तो उस आत्मा की शांति के…
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संतान की प्रतीक्षा जितनी लंबी, पीड़ा उतनी गहरी — यह हम समझते हैं। शास्त्रों में संतान प्राप्ति के लिए संतान गो…
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घर में अजीब घटनाएं। परिवार के किसी सदस्य का व्यवहार अचानक बदल जाना। रात में भय, बुरे स्वप्न, घर में कलह। विज्ञ…
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कभी-कभी समस्या एक नहीं होती — स्वास्थ्य, धन, रिश्ते, करियर, सब एक साथ बिगड़ने लगते हैं। समझ नहीं आता शुरुआत कह…
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हर बही-खाते पर लिखे दो शब्द — शुभ और लाभ। गणपति के ये दोनों पुत्र व्यापार की आत्मा हैं। नए व्यापार का आरंभ, दु…
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जन्मदिन पर केक तो कटेगा ही — पर संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद कौन देगा? शास्त्रों में जन्मदिन पर अष्टचिरंजीवी …
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नाम केवल पहचान नहीं — शास्त्रों के अनुसार नाम की ध्वनि जीवन भर व्यक्तित्व को गढ़ती है। नामकरण संस्कार सोलह संस…
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